संस्था की नियमावली

श्री KSB चैरिटी (Shri KSB Charity) के नियम, कार्यप्रणाली एवं मुख्य उद्देश्य

1. प्रस्तावना (Introduction)

श्री KSB चैरिटी एक पंजीकृत, गैर-लाभकारी और गैर-राजनीतिक संस्था है। यह संस्था पूर्ण रूप से समाज कल्याण, असहाय लोगों की सहायता और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित है। संस्था का मुख्य ध्येय समाज के उस वर्ग तक पहुंचना है जो बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा और चिकित्सा से वंचित है। संस्था बिना किसी जाति, धर्म या लिंग भेद के सभी जरूरतमंदों की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।

2. संस्था के मुख्य उद्देश्य (Main Objectives)

  • निर्धन कन्या विवाह: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की कन्याओं के विवाह में आर्थिक सहयोग एवं आवश्यक वस्तुएं प्रदान करना।
  • शिक्षा का प्रसार: गरीब और जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, स्कूल बैग, किताबें और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना।
  • निशुल्क चिकित्सा: ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में मेडिकल कैंप आयोजित करना, दवाइयों का वितरण और गंभीर बीमारियों में चिकित्सा सहायता देना।
  • वृद्धजन एवं महिला सशक्तिकरण: बुजुर्गों की देखभाल, आश्रय और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करना।
  • दिवंगत सहयोग (अंतिम संस्कार): असहाय और गरीब परिवारों को उनके परिजनों के अंतिम संस्कार हेतु आर्थिक एवं सामाजिक सहायता प्रदान करना।
"पारदर्शिता, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा ही श्री KSB चैरिटी की असली नींव है। हमारा लक्ष्य सिर्फ कुछ दिनों की सहायता देना नहीं है, बल्कि समाज के हर जरूरतमंद वर्ग को इतना सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है कि उन्हें भविष्य में किसी सहायता की आवश्यकता ही ना पड़े।"
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नितिन कुमार
संस्थापक एवं अध्यक्ष, Shri KSB Charity

3. सदस्यता के नियम (Membership Rules)

  • योग्यता: कोई भी भारतीय नागरिक जिसकी आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो और जो संस्था के उद्देश्यों में विश्वास रखता हो, वह संस्था का सदस्य/स्वयंसेवक बन सकता है।
  • सदस्यता शुल्क: संस्था से जुड़ने के लिए सदस्यता शुल्क (यदि कोई निर्धारित हो) का भुगतान करना होगा। यह राशि पूरी तरह से समाज सेवा के कार्यों में उपयोग की जाएगी।
  • सदस्यता की समाप्ति: यदि कोई सदस्य संस्था के नियमों का उल्लंघन करता है, संस्था की छवि धूमिल करता है, या बिना सूचना के लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो कार्यकारिणी समिति (Executive Committee) को उसकी सदस्यता रद्द करने का पूर्ण अधिकार होगा।

4. पदाधिकारियों के कार्य एवं अधिकार (Roles & Responsibilities)

संस्था के सुचारू संचालन के लिए एक कार्यकारिणी समिति का गठन किया जाएगा, जिसके मुख्य पदाधिकारियों के कार्य निम्नलिखित होंगे:

अध्यक्ष (President)

संस्था का नेतृत्व करना, सभी बैठकों की अध्यक्षता करना और संस्था के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेना।

सचिव (Secretary)

संस्था के सभी प्रशासनिक कार्यों को संभालना, बैठकों का एजेंडा तैयार करना और सभी सदस्यों के साथ समन्वय बनाए रखना।

कोषाध्यक्ष (Treasurer)

संस्था के सभी वित्तीय लेन-देन, दान (Donation) का हिसाब रखना और वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट तैयार करवाना।

5. बैंक खाता संचालन एवं कोष (Bank Account & Finance)

  • खाता संचालन (Account Operation): संस्था का बैंक खाता किसी राष्ट्रीयकृत या मान्यता प्राप्त बैंक में खोला जाएगा। खाते का संचालन अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो पदाधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षर (Joint Signatures) से किया जाएगा।
  • धन का उपयोग (Fund Utilization): संस्था को प्राप्त होने वाला सभी दान (Donation), चंदा और सदस्यता शुल्क केवल संस्था के उद्देश्यों (जैसे कन्या विवाह, चिकित्सा, शिक्षा आदि) के लिए ही खर्च किया जाएगा। कोई भी पदाधिकारी इसे निजी उपयोग में नहीं ले सकता।
  • ऑडिट (Audit): संस्था के आय-व्यय (Income & Expenditure) का पूरा हिसाब रखा जाएगा और हर वित्तीय वर्ष के अंत में एक मान्यता प्राप्त चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) द्वारा इसका ऑडिट करवाया जाएगा।

6. बैठकें एवं नियम संशोधन (Meetings & Amendments)

वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting): वर्ष में कम से कम एक बार संस्था के सभी सदस्यों की आम बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें पिछले वर्ष के कार्यों की समीक्षा और आगामी वर्ष की योजनाएं तय की जाएंगी।

कार्यकारिणी बैठक (Executive Meeting): संस्था के सुचारू संचालन के लिए कार्यकारिणी समिति की बैठक आवश्यकतानुसार (मासिक या त्रैमासिक) बुलाई जाएगी।

नियम संशोधन: नियमावली में किसी भी प्रकार का बदलाव या संशोधन करने का अधिकार केवल 'आम सभा' (General Body) को होगा, जो उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई (2/3) बहुमत से ही पारित किया जा सकेगा।

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